

भारत की ठगी की कहानियों में नटवरलाल का नाम लगभग लोककथा बन चुका है। कहा जाता है कि उन्होंने बड़े-बड़े लोगों को भी अपने जाल में फँसा लिया — और यही उनकी कहानी को वायरल बनाता है।
शुरुआत: दिमाग जो नियमों से तेज था
नटवरलाल बचपन से ही तेज दिमाग के लिए जाने जाते थे। कागज, हस्ताक्षर और पहचान के खेल में उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि लोग धोखा खाकर भी समझ नहीं पाते थे।
बड़े खेल
उनकी ठगी सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं थी — यह सिस्टम की कमजोरियों को समझने और इस्तेमाल करने की कला थी। हर कहानी के साथ उनका नाम और बड़ा होता गया।
विरासत: अपराध या लोककथा?
समय के साथ नटवरलाल का नाम एक मिथक बन गया — लोग आज भी उनकी कहानियाँ सुनकर हैरान होते हैं।
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