बहुत समय पहले, पहाड़ों और झीलों के पार एक दुनिया थी, जिसे लोग परीलोक कहते थे। वहाँ के पेड़ चाँदी जैसे चमकते थे, फूल रात में खिलते थे और नदियों का पानी हल्का-सा नीला चमकता था। उस लोक में कई परियाँ रहती थीं, लेकिन उनमें से एक सबसे अलग थी — चाँद की परी।
उसका नाम था एलीना।
एलीना बाकी परियों जैसी नहीं थी। बाकी परियाँ फूलों, तितलियों और गीतों में खुश रहती थीं, लेकिन एलीना को धरती की दुनिया के बारे में जानने की बहुत उत्सुकता थी।
वह अक्सर रात को चाँद के किनारे बैठकर नीचे धरती को देखती रहती थी — शहरों की रोशनी, पहाड़ों की परछाइयाँ, और कहीं-कहीं छोटे गाँव जहाँ देर रात तक एक-दो घरों में दीया जलता रहता था।
एक दिन उसने परी रानी से पूछा,
“क्या मैं धरती पर जा सकती हूँ?”
परी रानी ने कहा,
“जा तो सकती हो, लेकिन याद रखना — धरती पर समय अलग चलता है। वहाँ एक रात बिताओगी, तो यहाँ कई दिन बीत जाएँगे। और सबसे जरूरी बात — सूरज निकलने से पहले वापस आना होगा, नहीं तो तुम्हारे पंख हमेशा के लिए गायब हो जाएँगे।”
एलीना ने बिना सोचे हाँ कह दिया।
धरती पर पहली रात
उस रात एलीना चाँद की रोशनी के साथ धरती पर उतरी। वह एक छोटे से गाँव के पास उतरी, जहाँ कच्चे घर थे, पेड़ थे और दूर एक नदी बह रही थी।
उसे सब कुछ बहुत सुंदर लगा — हवा अलग थी, मिट्टी की खुशबू अलग थी, और सबसे अलग था सन्नाटा।
परियों के लोक में कभी पूरा सन्नाटा नहीं होता था, वहाँ हमेशा कोई न कोई गाना, हँसी या घंटियों की आवाज़ रहती थी। लेकिन यहाँ… सब शांत था।
वह धीरे-धीरे चलते हुए गाँव के अंदर आई। तभी उसने देखा कि एक लड़का घर के बाहर बैठा आसमान देख रहा था।
एलीना उसके पास गई और पूछा,
“तुम सोए क्यों नहीं?”
लड़का चौंक गया।
“तुम… कौन हो?”
एलीना मुस्कुराई,
“मैं… एक परी हूँ।”
लड़का हँसने लगा,
“अच्छा! और मैं राजा हूँ।”
एलीना ने अपने पंख दिखाए।
हल्की-सी चमक हवा में फैल गई।
लड़का चुप हो गया।
“तुम सच में परी हो…”
“हाँ,” एलीना बोली, “और तुम उदास क्यों हो?”
लड़का कुछ देर चुप रहा, फिर बोला,
“मैं बड़ा होकर इस गाँव से बाहर जाना चाहता हूँ, बहुत दूर। लेकिन सब कहते हैं कि यह बस सपना है।”
एलीना ने आसमान की ओर देखा, फिर बोली,
“जो चीज़ पहले सपना लगती है, वही बाद में कहानी बनती है।”
“क्या तुम मेरे लिए कुछ जादू कर सकती हो?” लड़के ने पूछा।
एलीना ने सिर हिलाया,
“मैं रास्ता नहीं बदल सकती, लेकिन मैं तुम्हें हिम्मत दे सकती हूँ।”
उसने अपने हाथ से एक छोटी-सी चमकती धूल निकाली और लड़के के हाथ पर रख दी।
“जब भी लगे कि तुम नहीं कर पाओगे, इसे याद करना। जादू इसमें नहीं, तुममें है।”
समय का भूल जाना
बात करते-करते एलीना समय भूल गई।
वह लड़के के साथ नदी तक गई, पेड़ों पर चमकती जुगनू देखे, और उसे परीलोक की कहानियाँ सुनाती रही।
अचानक लड़के ने कहा,
“देखो, सूरज निकल रहा है।”
एलीना का दिल जोर से धड़कने लगा।
उसे रानी की बात याद आई —
सूरज निकलने से पहले वापस आना होगा।
वह जल्दी से पहाड़ की तरफ भागी, जहाँ से वह आई थी।
लेकिन सूरज की पहली किरण निकल चुकी थी।
जैसे ही सूरज की रोशनी उसके पंखों पर पड़ी, उसके पंख धीरे-धीरे गायब होने लगे।
एलीना रुक गई।
अब वह वापस परीलोक नहीं जा सकती थी।
नई दुनिया
एलीना रोने लगी, लेकिन तभी पीछे से वही लड़का आया।
“क्या हुआ?”
एलीना ने कहा,
“अब मैं वापस अपने घर नहीं जा सकती।”
लड़का कुछ देर चुप रहा, फिर बोला,
“तो तुम यहाँ रह जाओ। मैं तुम्हें इस दुनिया के सारे रास्ते दिखाऊँगा।”
एलीना ने आँसू पोंछे और हल्का-सा मुस्कुराई।
“और मैं तुम्हें जादू दिखाऊँगी — लेकिन असली वाला नहीं, हिम्मत वाला।”
कई साल बाद
कई साल बीत गए।
वह लड़का बड़ा होकर सच में गाँव छोड़कर शहर गया, पढ़ाई की, काम किया, और एक दिन बहुत बड़ा आदमी बन गया। लेकिन उसके पास हमेशा एक छोटी-सी डिब्बी रहती थी, जिसमें कुछ नहीं था — सिर्फ चमक की याद।
और एलीना?
लोग कहते थे कि गाँव के पास रात को कभी-कभी एक लड़की दिखती है, जो बच्चों को कहानियाँ सुनाती है, उदास लोगों के पास बैठती है, और फिर अचानक गायब हो जाती है।
लोग उसे परी कहते थे।
लेकिन अब उसके पंख नहीं थे।
फिर भी वह परी थी।
क्योंकि लोग भूल जाते हैं—
परी पंखों से नहीं बनती,
परी वह होती है जो किसी की ज़िंदगी में थोड़ी-सी रोशनी छोड़ जाए।
