Table of Contents
यह कहानी है एक छोटे से कस्बे की, जहाँ एक साधारण लड़का रोहित रहता था। रोहित गरीब परिवार से था, लेकिन उसके अंदर दो चीज़ें बहुत खास थीं—ईमानदारी और मेहनत। यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी न केवल बच्चों के लिए, बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए एक गहरा संदेश देती है।
कहानी की शुरुआत
रोहित का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। उसके पिता एक किसान थे और माँ घर का काम संभालती थी। फसल खराब होने के कारण उनके घर की हालत और भी खराब हो गई थी। रोहित पढ़ाई में अच्छा था और उसका सपना था कि वह बड़ा होकर एक सफल इंजीनियर बने। लेकिन घर की परिस्थितियों के कारण वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था।
एक दिन रोहित ने सोचा कि वह पढ़ाई के साथ-साथ कुछ काम भी करेगा ताकि परिवार का सहारा बन सके। उसने कस्बे में छोटे-मोटे काम ढूँढने शुरू किए। कई जगह कोशिश की, लेकिन कोई काम नहीं मिला। आखिरकार उसे एक किराना दुकान में काम मिल गया। दुकान के मालिक का नाम था शर्मा जी।
शर्मा जी रोहित को देखकर बोले,
“बेटा, काम मेहनत का है। सुबह से शाम तक दुकान संभालनी होगी। क्या तुम कर पाओगे?”
रोहित ने बिना झिझक कहा,
“जी अंकल, मैं मेहनत करने से नहीं डरता।”
शर्मा जी मुस्कुराए और बोले,
“ठीक है, कल से आ जाना।”
नई जिम्मेदारी और नई चुनौती
रोहित ने अगले दिन से काम शुरू कर दिया। सुबह-सुबह दुकान पर पहुँचता, झाड़ू लगाता, सामान सजाता और ग्राहकों से विनम्रता से पेश आता। उसकी ईमानदारी देखकर शर्मा जी खुश हो गए। उन्होंने सोचा कि इस लड़के में भरोसा किया जा सकता है।
कुछ ही दिनों में रोहित ने दुकान का हिसाब-किताब भी संभालना शुरू कर दिया। वह हर पैसे का सही हिसाब रखता था। कस्बे में लोग उसकी ईमानदारी की चर्चा करने लगे।
लेकिन एक दिन एक ऐसी घटना हुई जिसने रोहित की जिंदगी बदल दी।
परीक्षा का दिन
एक दोपहर दुकान पर बहुत भीड़ थी। रोहित ग्राहकों को सामान दे रहा था कि तभी एक बुज़ुर्ग आदमी आया। उसने जल्दी-जल्दी सामान खरीदा और पैसे देकर चला गया। रोहित ने सामान की लिस्ट देखी तो पाया कि उस आदमी ने सौ रुपये ज्यादा दे दिए थे।
उस समय रोहित के मन में दो ख्याल आए।
पहला ख्याल—“घर की हालत खराब है, ये सौ रुपये रख लूँ तो क्या फर्क पड़ेगा? किसी को पता भी नहीं चलेगा।”
दूसरा ख्याल—“लेकिन ये गलत है। ईमानदारी सबसे बड़ी चीज़ है। अगर मैंने ऐसा किया तो मैं अपनी आत्मा से झूठ बोलूँगा।”
रोहित ने दूसरे ख्याल को चुना। उसने दौड़कर उस बुज़ुर्ग आदमी को पकड़ा और बोला,
“अंकल, आपने सौ रुपये ज्यादा दे दिए।”
बुज़ुर्ग ने आश्चर्य से रोहित की तरफ देखा और कहा,
“बेटा, आजकल कौन इतना ईमानदार होता है? भगवान तुम्हें खुश रखे।”
उसने आशीर्वाद दिया और चला गया।
किस्मत का खेल
यह बात यहीं खत्म नहीं हुई। अगले दिन वही बुज़ुर्ग आदमी फिर दुकान पर आया। इस बार वह अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ एक और सज्जन थे। वे कस्बे के एक बड़े उद्योगपति थे। बुज़ुर्ग आदमी ने रोहित को देखकर कहा,
“यह वही लड़का है जिसके बारे में मैंने आपको बताया था—ईमानदार और मेहनती।”
उद्योगपति ने रोहित से कुछ सवाल पूछे और फिर बोले,
“क्या तुम हमारे ऑफिस में काम करना चाहोगे? पढ़ाई के साथ हम तुम्हें पार्ट-टाइम नौकरी देंगे। और अगर अच्छा काम किया तो आगे भी मदद करेंगे।”
रोहित की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने तुरंत हाँ कर दी।
नई जिंदगी की शुरुआत
अब रोहित की जिंदगी बदल गई। उसे पार्ट-टाइम नौकरी से अच्छी सैलरी मिलने लगी। उसने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू किया और समय पर काम भी करता। उसकी लगन और ईमानदारी देखकर उद्योगपति ने उसकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दे दी।
कई साल बाद रोहित ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और उसी कंपनी में उच्च पद पर नौकरी पाई। आज वह न सिर्फ सफल है, बल्कि दूसरों की मदद भी करता है।
कहानी का निष्कर्ष
मोरल (Moral):
इस नैतिक हिंदी कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, ईमानदारी और मेहनत का रास्ता हमेशा सही होता है। शॉर्टकट अपनाने से तात्कालिक लाभ मिल सकता है, लेकिन लंबे समय तक सफलता पाने के लिए सच्चाई ही सबसे बड़ा हथियार है।