आधी रात का स्टेशन – एक सच्ची डरावनी कहानी

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भारत के एक छोटे से शहर में एक पुराना रेलवे स्टेशन था।
दिन में वहां काफी भीड़ रहती थी, लेकिन रात होते ही स्टेशन बिल्कुल सुनसान हो जाता था।

लोग कहते थे कि रात के बाद उस स्टेशन पर कुछ अजीब होता है।

लेकिन किसी के पास इसका पक्का सबूत नहीं था।

नई नौकरी और पहली रात | डरावनी कहानी

अजय को हाल ही में रेलवे में नौकरी मिली थी।
उसकी पोस्टिंग उसी पुराने स्टेशन पर हुई।

पहले दिन ही स्टेशन के एक बुजुर्ग कर्मचारी ने उससे कहा—

“बेटा, रात की ड्यूटी में प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर ज्यादा मत जाना।”

अजय ने हंसते हुए पूछा—

“क्यों? वहां क्या है?”

बुजुर्ग ने धीरे से कहा—

“वहां… एक यात्री आता है।”

अजय को यह सब मजाक लगा।

आधी रात का सन्नाटा | डरावनी कहानी

उस रात अजय की ड्यूटी थी।

करीब रात के 1 बजे स्टेशन पूरी तरह खाली हो गया।

हवा की हल्की आवाज़ और दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़ ही सुनाई दे रही थी।

अजय टिकट खिड़की के पास बैठा था।

अचानक उसे लगा कि कोई प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर खड़ा है।

रहस्यमयी यात्री | डरावनी कहानी

अजय धीरे-धीरे वहां गया।

वहां एक आदमी खड़ा था।

उसने पुराने जमाने के कपड़े पहने हुए थे।

उसका चेहरा थोड़ा अजीब लग रहा था।

उसने अजय से पूछा—

“यह ट्रेन कब आएगी?”

अजय ने पूछा—

“कौन सी ट्रेन?”

वह आदमी बोला—

“जो मुझे घर ले जाएगी।”

उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी… जैसे हवा में घुल रही हो।

अचानक गायब | डरावनी कहानी

अजय ने टाइम टेबल देखने के लिए नीचे देखा।

लेकिन जैसे ही उसने सिर उठाया…

वह आदमी वहां नहीं था।

पूरा प्लेटफॉर्म खाली था।

अजय को लगा शायद उसकी आंखों का धोखा होगा।

वह वापस अपनी जगह आ गया।

डर की शुरुआत | डरावनी कहानी

करीब 10 मिनट बाद अचानक लाउडस्पीकर अपने आप चालू हो गया।

लेकिन स्टेशन पर उस समय कोई ट्रेन आने वाली नहीं थी।

स्पीकर से एक अजीब आवाज़ आई—

“ट्रेन… आ रही है…”

अजय का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

पुराना हादसा | डरावनी कहानी

अगले दिन अजय ने स्टेशन के बुजुर्ग कर्मचारी से सब कुछ बताया।

बुजुर्ग ने गहरी सांस ली और कहा—

“लगता है तुमने उसे देख लिया।”

अजय ने पूछा—

“किसे?”

बुजुर्ग बोले—

“करीब 40 साल पहले इसी प्लेटफॉर्म पर एक आदमी ट्रेन का इंतजार कर रहा था।”

“लेकिन ट्रेन आने से पहले ही उसका एक्सीडेंट हो गया।”

“तब से लोग कहते हैं कि उसकी आत्मा हर रात यहां आती है…”

“और अपनी ट्रेन का इंतजार करती है।”

आखिरी डरावनी बात

उस दिन के बाद अजय कभी प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर रात में नहीं गया।

लेकिन कुछ दिनों बाद जब उसने स्टेशन का पुराना रिकॉर्ड देखा…

तो उसकी रूह कांप गई।

उस रिकॉर्ड में उस आदमी की तस्वीर लगी थी।

और वही चेहरा था…

जिसे अजय ने उस रात प्लेटफॉर्म पर देखा था।

तब अजय को समझ आया—

कुछ मुसाफ़िर कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंच पाते।

और शायद…
वे आज भी अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं।

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